प्रयागराज(Prayagraj):
जिले में रह रे एक मां-बाप अपने बेटे से पीछले 19 साल से बिछड़ कर रह रहे
थे. बेटे के लापता होने के गम में उन्होंने 19 साल निकाल दिए. लेकिन बेटा
उसी इलाके में एक दूसरे घर में पलता बढ़ता रहा. एक दो नहीं पूरे 19 वर्ष तक
और किसी को भनक तक नहीं लगी.
किस्मत ने फिर एक खेल खेला और 19 वर्ष से जिगर के टुकड़े की आस में तड़प रहे मां-बाप के पास फिर उनका बेटा पहुंच गया. दरअसल, चैथम लाइन में रहने वाले अवधेश मिश्रा का 6 वर्ष का बेटा आकाश 2001 में लापता हो गया था. बहुत ढूंढने के बाद भी उसका कुछ पता नहीं चला. इसके बाद घर वालों ने कर्नलगंज थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई. पुलिस ने कई दिनों तक हाथ-पांव मारे लेकिन बच्चे का कुछ पता नहीं चला.
मां-बाप भी थाने का चक्कर लगाकर थक गए और फिर उन्होंने बेटे के मिलने की आस भी छोड़ दी. लेकिन, इसी वर्ष मार्च में दोनों की आंखें तब फटी रह गईं, जब 19 वर्ष बाद बेटा फिर से उनके सामने आ खड़ा हुआ. मां बाप के पूछने पर उसने बताया कि गायब होने के बाद से वह कटरा में रहने वाले विनोद गुप्ता के घर रहा जिन्होंने उसे बेटे की तरह रखा. उधर, जिस विनोद के घर में आकाश रह रहा था, उन्होंने उसके अचानक गायब होने पर 30 मार्च को कर्नलगंज थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई.
इसके बाद पुलिस ने कुछ ही दिन में आकाश को ढूंढ निकाला. बृहस्पतिवार को पुलिस उसे लेकर थाने आई तो अवधेश और विनोद दोनों ही उसे अपना बेटा बताने लगे. विनोद का कहना था कि उसने आकाश को एक अनाथालय से गोद लिया. लेकिन, पुलिस के मांगने पर वह कोई दस्तावेज नहीं दिखा पाया. निस्तारण के लिए पुलिस मजिस्ट्रेट के पास भी गई लेकिन उन्होंने मुकदमा न होने की वजह से कोई भी फैसला देने में असमर्थता जता दी.
इसके बाद पुलिस के आला अधिकारियों ने अपने स्तर से मामले का निस्तारण किया. पूछताछ में युवक ने भी अपने मूल पिता के घर जाकर उनके साथ रहने की इच्छा जताई. इसके बाद उसे वहां भेज दिया गया
किस्मत ने फिर एक खेल खेला और 19 वर्ष से जिगर के टुकड़े की आस में तड़प रहे मां-बाप के पास फिर उनका बेटा पहुंच गया. दरअसल, चैथम लाइन में रहने वाले अवधेश मिश्रा का 6 वर्ष का बेटा आकाश 2001 में लापता हो गया था. बहुत ढूंढने के बाद भी उसका कुछ पता नहीं चला. इसके बाद घर वालों ने कर्नलगंज थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई. पुलिस ने कई दिनों तक हाथ-पांव मारे लेकिन बच्चे का कुछ पता नहीं चला.
मां-बाप भी थाने का चक्कर लगाकर थक गए और फिर उन्होंने बेटे के मिलने की आस भी छोड़ दी. लेकिन, इसी वर्ष मार्च में दोनों की आंखें तब फटी रह गईं, जब 19 वर्ष बाद बेटा फिर से उनके सामने आ खड़ा हुआ. मां बाप के पूछने पर उसने बताया कि गायब होने के बाद से वह कटरा में रहने वाले विनोद गुप्ता के घर रहा जिन्होंने उसे बेटे की तरह रखा. उधर, जिस विनोद के घर में आकाश रह रहा था, उन्होंने उसके अचानक गायब होने पर 30 मार्च को कर्नलगंज थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई.
इसके बाद पुलिस ने कुछ ही दिन में आकाश को ढूंढ निकाला. बृहस्पतिवार को पुलिस उसे लेकर थाने आई तो अवधेश और विनोद दोनों ही उसे अपना बेटा बताने लगे. विनोद का कहना था कि उसने आकाश को एक अनाथालय से गोद लिया. लेकिन, पुलिस के मांगने पर वह कोई दस्तावेज नहीं दिखा पाया. निस्तारण के लिए पुलिस मजिस्ट्रेट के पास भी गई लेकिन उन्होंने मुकदमा न होने की वजह से कोई भी फैसला देने में असमर्थता जता दी.
इसके बाद पुलिस के आला अधिकारियों ने अपने स्तर से मामले का निस्तारण किया. पूछताछ में युवक ने भी अपने मूल पिता के घर जाकर उनके साथ रहने की इच्छा जताई. इसके बाद उसे वहां भेज दिया गया
